🙏 हर हर महादेव 🙏      🙏 ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥ 🙏      🙏 हर हर महादेव 🙏      🙏 ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥ 🙏      🙏 हर हर महादेव 🙏      🙏 ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥ 🙏

🛕

पहुँचने के लिए कैसे करें

उमानंदा मंदिर की पवित्र तीर्थयात्रा की योजना बनाएं।

जगह

मोर द्वीप, ब्रह्मपुत्र

नौका सेवा

कछारी घाट से, ₹20-40

स्थान

पीकॉक आइलैंड, ब्रह्मपुत्र

महाशिवरात्रि

सबसे बड़ा उत्सव

यात्रा विकल्प

🪷

समृद्ध इतिहास जानें, अपनी यात्रा की योजना बनाएं, और दिव्य उत्सवों का अनुभव करें

नौका द्वारा

द्वीप तक पहुँचने का यही एकमात्र रास्ता है।

  • मैंने कोशारी गंतव्यों, गोहेत से प्रबंधन किया
  • फेरी हर 15-30 मिनट में चलती है।
  • यात्रा का समय: 10-15 मिनट
  • टिकट: ₹20-30 प्रति व्यक्ति

रेलवे स्टेशन से

द्वीप तक पहुँचने का यही एकमात्र रास्ता है।

  • मैंने कोशारी गंतव्यों, गोहेत से प्रबंधन किया
  • फेरी हर 15-30 मिनट में चलती है।
  • यात्रा का समय: 10-15 मिनट
  • टिकट: ₹20-30 प्रति व्यक्ति

एयरपोर्ट से

द्वीप तक पहुँचने का यही एकमात्र रास्ता है।

  • मैंने कोशारी गंतव्यों, गोहेत से प्रबंधन किया
  • फेरी हर 15-30 मिनट में चलती है।
  • यात्रा का समय: 10-15 मिनट
  • टिकट: ₹20-30 प्रति व्यक्ति

🕉️

मंदिर वास्तुकला

🪷

प्राचीन शिल्पकला और नक्काशी

मंदिर दर्शन

सुबह 5:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक

फेरी सेवा

सुबह 7:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक

सुबह की आरती

सुबह के 6 बजे

संध्या आरती

5:00 पूर्वाह्न

🕉️

जगह

🪷

उमानंदा मंदिर ब्रह्मपुत्र नदी के मध्य में स्थित मोर द्वीप (उमानंदा द्वीप) पर स्थित है, जहां गुवाहाटी के कचारी घाट से नौका द्वारा ही पहुंचा जा सकता है।


पता

उमानंदा मंदिर
मयूर द्वीप (उमानानंदा द्वीप)
ब्रह्मपुत्र नदी
गुवाहाटी, असम 781001
भारत

🕉️

आगंतुक युक्तियाँ

🪷

गुवाहाटी की यात्रा के दौरान अन्य स्थलों का भी भ्रमण करें।

ड्रेस कोड

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव यहाँ गहरे ध्यान में थे, तब कामदेव (प्रेम के देवता) ने उनकी तपस्या भंग कर दी थी। क्रोधित होकर शिव ने अपने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म कर दिया।

फोटोग्राफी

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव यहाँ गहरे ध्यान में थे, तब कामदेव (प्रेम के देवता) ने उनकी तपस्या भंग कर दी थी। क्रोधित होकर शिव ने अपने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म कर दिया।

बंदर सुरक्षा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव यहाँ गहरे ध्यान में थे, तब कामदेव (प्रेम के देवता) ने उनकी तपस्या भंग कर दी थी। क्रोधित होकर शिव ने अपने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म कर दिया।

सीढ़ियाँ चढ़ें

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव यहाँ गहरे ध्यान में थे, तब कामदेव (प्रेम के देवता) ने उनकी तपस्या भंग कर दी थी। क्रोधित होकर शिव ने अपने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म कर दिया।

🕉️

आस-पास के आकर्षण

🪷

गुवाहाटी की यात्रा के दौरान अन्य स्थलों का भी भ्रमण करें।

कामाख्या मंदिर

10 कि.मी

30 मिनट

कामाख्या मंदिर

10 कि.मी

30 मिनट

कामाख्या मंदिर

10 कि.मी

30 मिनट

कामाख्या मंदिर

10 कि.मी

30 मिनट

कामाख्या मंदिर

10 कि.मी

30 मिनट

🙏

घूमने का सबसे अच्छा समय: अक्टूबर से मार्च

सुहावना मौसम और मार्च में महाशिवरात्रि का विशेष उत्सव।

Scroll to Top